
किन्तु पल्लवित
मनुष्यों के असीम अनंत दृश्य में होना हुआ.
भाग्य की रेखाओं से आती वायु के वेग में
मेरी उम्र के बरस बर्फ के मैदानों तक बिखरे.
वेदों की भाषा का अध्ययन, प्रसार, शिक्षण की कामना.
मेरी निर्दोष दृष्टि मेरा सम्मान.
तेरी चाहना मेरा अंतस.
तेरा होना मेरा होना.
जब कभी उदासी तुमको अपने पास बुलाएगी,
मेरी छुअन लौटा लाएगी तुमको.
No comments:
Post a Comment