Thursday, February 14, 2008

आसक्ति उतरेगी

एक दिन मेरा हो जाता
जो स्वप्न था
उस एक दिन के इंतज़ार में
बीत गयी जाने कितनी रातें.
तुम क्या जानों कि
कितना कठिन है
तुम्हारी उपेक्षाओं की परछाई तले जीना.
कैसे मैं कोसूं तुमको
कि मेरे स्वप्न भी तुम ही हो
कभी तो मेरी रूह छू जायेगी
कभी तुम समझोगे मेरा प्रेम,
आसक्ति उतरेगी

Tuesday, October 2, 2007

अनंत आकाश में

मैं जो कहूँ
कि कोई पुष्प ले रहा है आकार
तुम्हरे पश्चात.

कोई अज्ञात
हर लेना चाहता है मेरी उदासी
किन्तु
रेत कण सी बिखर जाती है प्रतीक्षा
अनंत आकाश में.

Tuesday, September 25, 2007

बस एक बार

और क्या कुछ न किया तुमने
मुझे पिरोया अपने हर अंग में.

अब कोई उलीचता है
तुम्हारी याद के घड़े भर-भर
कुछ भीगता फिर भी नहीं.

एक कामना
पुलकित हो मचल जाती है
पुनः पिरोलो एक बार,
बस एक बार.

Wednesday, August 8, 2007

मेरा आश्रय

स्मृति के सघन में
रात चुनती रहती है सम्बन्धों के शेष

मैं उधड़ जाऊं सत्य की तरह
तब तुम्हारे अंक में मिले ठौर.

तुम्हारा आलिंगन
मेरा आश्रय है.

Thursday, July 19, 2007

आवृतियाँ

पिया
उदासी का झरोखा
बनता है
पीर की दग्ध सलाखों से.

दूर से चमकती हैं
रक्ताभ रेखाओं के बीच
दुखों की आवृतियाँ.

इकहरा है सबकुछ
सबकुछ जो है मेरे विपरीत.

मोरपंख
रात्रि में खो देता है आभा
मन नहीं खोता कोई भी रंग.

Wednesday, July 4, 2007

लेख

नहीं हो पाया उजला
उसका लिखा काला लेख.

सलाइयों से उधेड़ रहा है जीवन के
जीवन को बुनने वाला.

अश्रु समझते हैं, प्रत्येक भाषा नुकीली.

Saturday, May 26, 2007

रात की कोरी छुअन

एक अजीर्ण चाँद जब आसमान में नहीं होता
तब भी चमकता है
ज्यों मेरी निद्रा मुझ तक नहीं आती
तब होती है तुम्हारे पास.

अधरों की सुवास
रात की कोरी छुअन की किनारी से
उतरती है आँगन.

एक लौ की तरह टिमटिमाती
कविता
अंकित होती है जीवन पृष्ठ पर.