रंगरेज़ मेरे ...
क्यूँ ना बनाया तुमने
धूप के रंग का मिश्रण
मेरे नैन-पाखी के पंखों का वर्ण
रंग हल्का सा ...
हल्की हया का....
पीत हल्दी से प्रीत-प्रणय का
सुर्खी सुबह के सूरज वाली
हरी काँच की चूड़ी वाली
क्यों भाया तुमको स्वाद रुदन का
रंग घोला तुमने नित्य प्रपंच का
क्यूँ आंच बनाई छल-अग्नि की
क्यूँ देग चढ़ाई मेरे रूह की
किस पानी से कपट बनाया
किस कूँची से भाग्य ठगाया
बस शाल रंगाई छिद्रों वाली
हर बूटे पर विष फैलाया
रंगरेज़ मेरे ......
क्यूँ ना बनाया तुमने
धूप के रंग का मिश्रण
मेरे नैन-पाखी के पंखों का वर्ण
रंग हल्का सा ...
हल्की हया का....
पीत हल्दी से प्रीत-प्रणय का
सुर्खी सुबह के सूरज वाली
हरी काँच की चूड़ी वाली
क्यों भाया तुमको स्वाद रुदन का
रंग घोला तुमने नित्य प्रपंच का
क्यूँ आंच बनाई छल-अग्नि की
क्यूँ देग चढ़ाई मेरे रूह की
किस पानी से कपट बनाया
किस कूँची से भाग्य ठगाया
बस शाल रंगाई छिद्रों वाली
हर बूटे पर विष फैलाया
रंगरेज़ मेरे ......





