Wednesday, June 9, 2010
Monday, July 27, 2009
ओट
संग हो सकते थे
तुम.
कोई ओट ही होती
होती कोई अजानी बात.
मैं चूम लेती किसी भी बहाने
मेरे छल, मेरे जीवन प्राण हैं.
तुम.
कोई ओट ही होती
होती कोई अजानी बात.
मैं चूम लेती किसी भी बहाने
मेरे छल, मेरे जीवन प्राण हैं.
Wednesday, July 22, 2009
तुम्हारे साथ
तुम्ही ने कहा था
कि मैंने सोच लिया है रहना तुम्हारे साथ
मैंने शुभ्र आकाश और निर्मल समंदर की सौगंध खाकर कहा
आये हो जिस तरह तुम आंधी और बरसात में
मैं भी दुनिया की हर बाधा को करूँ पार तुम्हारे लिए
तुम्हारे साथ
कि मैंने सोच लिया है रहना तुम्हारे साथ
मैंने शुभ्र आकाश और निर्मल समंदर की सौगंध खाकर कहा
आये हो जिस तरह तुम आंधी और बरसात में
मैं भी दुनिया की हर बाधा को करूँ पार तुम्हारे लिए
तुम्हारे साथ
Friday, July 10, 2009
अंकुरण
वे जो स्वर रुंध गए
उनमे तुम्हारे गीत थे
वे जो सूख गए अक्षर
पी गयी उनको
तुम्हारे तिरस्कार की अग्नि.
प्रिये
नेह बीज पुनः अंकुरित होगा.
उनमे तुम्हारे गीत थे
वे जो सूख गए अक्षर
पी गयी उनको
तुम्हारे तिरस्कार की अग्नि.
प्रिये
नेह बीज पुनः अंकुरित होगा.
Tuesday, June 17, 2008
Saturday, April 19, 2008
किस विध इतने
तुममें कुछ नहीं टूटता क्या
जब तुम तोड़ते हो किसी को
मैं एक पाषण की करूँ वंदना अनंत
मैं एक पाषण से करूँ विनती
किसी पुष्प का खिल जाना अनुभूत होता है कभी तुमको
कही तुम किसी कांटे से बचाकर चलते हो
तुम किस विध इतने विकट
कठोर
असम्भव
जब तुम तोड़ते हो किसी को
मैं एक पाषण की करूँ वंदना अनंत
मैं एक पाषण से करूँ विनती
किसी पुष्प का खिल जाना अनुभूत होता है कभी तुमको
कही तुम किसी कांटे से बचाकर चलते हो
तुम किस विध इतने विकट
कठोर
असम्भव
Thursday, February 14, 2008
आसक्ति उतरेगी
एक दिन मेरा हो जाता
जो स्वप्न था
उस एक दिन के इंतज़ार में
बीत गयी जाने कितनी रातें.
तुम क्या जानों कि
कितना कठिन है
तुम्हारी उपेक्षाओं की परछाई तले जीना.
कैसे मैं कोसूं तुमको
कि मेरे स्वप्न भी तुम ही हो
कभी तो मेरी रूह छू जायेगी
कभी तुम समझोगे मेरा प्रेम,
आसक्ति उतरेगी
जो स्वप्न था
उस एक दिन के इंतज़ार में
बीत गयी जाने कितनी रातें.
तुम क्या जानों कि
कितना कठिन है
तुम्हारी उपेक्षाओं की परछाई तले जीना.
कैसे मैं कोसूं तुमको
कि मेरे स्वप्न भी तुम ही हो
कभी तो मेरी रूह छू जायेगी
कभी तुम समझोगे मेरा प्रेम,
आसक्ति उतरेगी
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