तुम्ही ने कहा था
कि मैंने सोच लिया है रहना तुम्हारे साथ
मैंने शुभ्र आकाश और निर्मल समंदर की सौगंध खाकर कहा
आये हो जिस तरह तुम आंधी और बरसात में
मैं भी दुनिया की हर बाधा को करूँ पार तुम्हारे लिए
तुम्हारे साथ
तुममें कुछ नहीं टूटता क्या
जब तुम तोड़ते हो किसी को
मैं एक पाषण की करूँ वंदना अनंत
मैं एक पाषण से करूँ विनती
किसी पुष्प का खिल जाना अनुभूत होता है कभी तुमको
कही तुम किसी कांटे से बचाकर चलते हो
तुम किस विध इतने विकट
कठोर
असम्भव
एक दिन मेरा हो जाता
जो स्वप्न था
उस एक दिन के इंतज़ार में
बीत गयी जाने कितनी रातें.
तुम क्या जानों कि
कितना कठिन है
तुम्हारी उपेक्षाओं की परछाई तले जीना.
कैसे मैं कोसूं तुमको
कि मेरे स्वप्न भी तुम ही हो
कभी तो मेरी रूह छू जायेगी
कभी तुम समझोगे मेरा प्रेम,
आसक्ति उतरेगी