Thursday, June 28, 2012
Thursday, October 20, 2011
जीना निरंतर
असम्भव ही था
किन्तु नम भीगी संध्या में
तपिश असीमित.
तुम्हारी कांपती स्मृति
स्पर्श करती चलती है
मेरा मन.
असंभव ही था इस तरह जीना, जो निरंतर है.
किन्तु नम भीगी संध्या में
तपिश असीमित.
तुम्हारी कांपती स्मृति
स्पर्श करती चलती है
मेरा मन.
असंभव ही था इस तरह जीना, जो निरंतर है.
Sunday, October 10, 2010
कच्ची मिट्टी की खोह
कच्ची मिट्टी की खोह में
प्रिय संग बसाया एक आगार.
नम वायु के झोंके
दीवस के दीप्त मध्याहन
रात्रि की श्याम चादर
ज्यों कोई अश्रु भरी आँखें
अग्नि भरा ह्रदय
और आस रहित जीवन.
मैं अपनी चुप्पी से कहूँ
बाँधे अपना धीर
तुम सुनो पुकार कि आना एक बार.
प्रिय संग बसाया एक आगार.
नम वायु के झोंके
दीवस के दीप्त मध्याहन
रात्रि की श्याम चादर
ज्यों कोई अश्रु भरी आँखें
अग्नि भरा ह्रदय
और आस रहित जीवन.
मैं अपनी चुप्पी से कहूँ
बाँधे अपना धीर
तुम सुनो पुकार कि आना एक बार.
Sunday, August 15, 2010
तुम्हारे लिए
अध खुले अधर
नमक के समुद्र में
चुनते हुए बिछोह के मोती.
अकस्मात वर्षा के
आगमन की भांति
तुम घेर लो मुझे. मेरे सम्पूर्ण को.
मैं आती हूँ जगत में तुम्हारे लिए
ओ प्रिये.
नमक के समुद्र में
चुनते हुए बिछोह के मोती.
अकस्मात वर्षा के
आगमन की भांति
तुम घेर लो मुझे. मेरे सम्पूर्ण को.
मैं आती हूँ जगत में तुम्हारे लिए
ओ प्रिये.
Wednesday, June 9, 2010
Monday, July 27, 2009
ओट
संग हो सकते थे
तुम.
कोई ओट ही होती
होती कोई अजानी बात.
मैं चूम लेती किसी भी बहाने
मेरे छल, मेरे जीवन प्राण हैं.
तुम.
कोई ओट ही होती
होती कोई अजानी बात.
मैं चूम लेती किसी भी बहाने
मेरे छल, मेरे जीवन प्राण हैं.
Wednesday, July 22, 2009
तुम्हारे साथ
तुम्ही ने कहा था
कि मैंने सोच लिया है रहना तुम्हारे साथ
मैंने शुभ्र आकाश और निर्मल समंदर की सौगंध खाकर कहा
आये हो जिस तरह तुम आंधी और बरसात में
मैं भी दुनिया की हर बाधा को करूँ पार तुम्हारे लिए
तुम्हारे साथ
कि मैंने सोच लिया है रहना तुम्हारे साथ
मैंने शुभ्र आकाश और निर्मल समंदर की सौगंध खाकर कहा
आये हो जिस तरह तुम आंधी और बरसात में
मैं भी दुनिया की हर बाधा को करूँ पार तुम्हारे लिए
तुम्हारे साथ
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