Wednesday, July 22, 2009

तुम्हारे साथ

तुम्ही ने कहा था
कि मैंने सोच लिया है रहना तुम्हारे साथ
मैंने शुभ्र आकाश और निर्मल समंदर की सौगंध खाकर कहा
आये हो जिस तरह तुम आंधी और बरसात में
मैं भी दुनिया की हर बाधा को करूँ पार तुम्हारे लिए
तुम्हारे साथ

Friday, July 10, 2009

अंकुरण

वे जो स्वर रुंध गए
उनमे तुम्हारे गीत थे

वे जो सूख गए अक्षर
पी गयी उनको
तुम्हारे तिरस्कार की अग्नि.

प्रिये
नेह बीज पुनः अंकुरित होगा.

Tuesday, June 17, 2008

चाह



संभव है मन को
बिछोह ही चाह थी.

अक्षर नहीं पिरोते
तुम्हारे व्यवहार को अपनी माल में. 



Saturday, April 19, 2008

किस विध इतने

तुममें कुछ नहीं टूटता क्या
जब तुम तोड़ते हो किसी को
मैं एक पाषण की करूँ वंदना अनंत
मैं एक पाषण से करूँ विनती
किसी पुष्प का खिल जाना अनुभूत होता है कभी तुमको
कही तुम किसी कांटे से बचाकर चलते हो
तुम किस विध इतने विकट
कठोर
असम्भव

Thursday, February 14, 2008

आसक्ति उतरेगी

एक दिन मेरा हो जाता
जो स्वप्न था
उस एक दिन के इंतज़ार में
बीत गयी जाने कितनी रातें.
तुम क्या जानों कि
कितना कठिन है
तुम्हारी उपेक्षाओं की परछाई तले जीना.
कैसे मैं कोसूं तुमको
कि मेरे स्वप्न भी तुम ही हो
कभी तो मेरी रूह छू जायेगी
कभी तुम समझोगे मेरा प्रेम,
आसक्ति उतरेगी

Tuesday, October 2, 2007

अनंत आकाश में

मैं जो कहूँ
कि कोई पुष्प ले रहा है आकार
तुम्हरे पश्चात.

कोई अज्ञात
हर लेना चाहता है मेरी उदासी
किन्तु
रेत कण सी बिखर जाती है प्रतीक्षा
अनंत आकाश में.

Tuesday, September 25, 2007

बस एक बार

और क्या कुछ न किया तुमने
मुझे पिरोया अपने हर अंग में.

अब कोई उलीचता है
तुम्हारी याद के घड़े भर-भर
कुछ भीगता फिर भी नहीं.

एक कामना
पुलकित हो मचल जाती है
पुनः पिरोलो एक बार,
बस एक बार.