Thursday, February 23, 2012

मृदु-कम्पन सी...

मृदु-कम्पन सी...

रात की पीर रही....

हर अश्रु चल रहा..

अज्ञात सिन्दूर स्वप्न रहा ..

प्राण-प्रातः ही की आस रही..

घूँट भर चाह की चाह रही..

हर सुनहला प्याला किरणों का..

पिलाता रहा उन्माद नींद का...

औ सस्मित देव मेरे..

प्रतिबिंबित रहे...

हर मधुर व्यथा के..

मृदु छालों में बसे...

''तेरे'' इसी पीर का उपहार...

रहा मेरी आँहों का आधार...

Wednesday, February 22, 2012

बड़ी दूर से ...

बड़ी दूर से ...
स्मिति मुस्कान लिए....
देखा करते हो मुझे...
कि जब भी..
हूक उठती है जी की...
बस...
पुकारा करती हूँ तुम्हे...
और तुम हो ...कि
बड़ी दूर से....
स्मिति मुस्कान लिए ...
बस...देखा करते हो मुझे...

Tuesday, February 21, 2012

मैं कहीं भी जाती हूँ....

मैं कहीं भी जाती हूँ....

उसी आधे से रास्ते पर....

आधी सी मैं....

खो जाती हूँ बार-बार ....

कभी गली का नाम नहीं होता....

कभी खुद का नाम भुला देती हूँ...

मैं कहीं भी सोती हूँ ....

उसी बरसे से बादल के नीचे....

तरसी सी मैं...

पी लेती हूँ बार बार ...

कभी सूखी सी बारिशों को ....

कभी भीगी सी चाँदनी चुरा लेती हूँ...

Monday, February 20, 2012

''साथी'' का मुहर....

''साथी'' का मुहर....

बस तन पर ही रहा अंकित....

मन मेरा....

छू भी ना पाए तुम.....

जिस राह पर चलना था साथ...

बस तकते रहा किये तुम्हे...

आवाज़ मेरी...

सुन ही ना पाए तुम....

Tuesday, February 14, 2012

तुमने जितने बरस खरीदे मेरे...

तुमने जितने बरस खरीदे मेरे...

उनका हिसाब..

तुम्हारे खाते में...

दिन-दिन शरीर दर्ज करता रहा....

कभी रूह बिलोई ...

कभी आँखें रोई...

और समय हँसता रहा...

पर इस कच्ची गिनती से..

तोड़ लिए मैंने..

कुछ पके से लम्हे ...

थोड़े से वर्जित...

थोड़े से सहमे..

उसी गबन को छिप -छिपाकर

लम्हों का गुच्छा बना कर...

छल्ला इक पिरो लिया मैंने..

कमर से बाँध ली,...

हर चाबी की खनक...

कि आज..

सारे ताले खोल लिए मैंने....

Saturday, February 11, 2012

आज फिर हमने ....

आज फिर हमने

चाँद मिटा दिया....

नवेली निशा के...

भौहों पर तारे सजे थे...

लबों की ख़ामोशी ने....

सब सुना दिया....

यादें थी कुछ दबी सी उन पर...

हमारी किस्मत ने ...

उन्हें हमारे चौके से ...

भूखा उठा दिया ...

चूल्हे में...

चूल्हे में...

रात की रोटी की...

महक बाकी है अब तक....

कोयले की ताप से...

गरमाया हैं मेरा चोला....

आँचल की सिलवटों में...

तुम्हारी ही छुअन की ..

नरमाई है अब तक...

उसी सौंधी गंध को पाती.....

अब तक माटी में..

आग सेंक रही है यादें ....

जो ख्वाब बुनती रही....

जो ख्वाब बुनती रही....

उसे उधेड़ते रहे ....

मेरे हाथों की लकीरें ..

उन लकीरों में कहीं....

तुम्हारा भी तो नाम था....

उस प्रिय की क्या बात....

उस प्रिय की क्या बात....

जिसे..

जुएँ में......

दुनिया से हार गयी.....

सारी दुनियां उनकी रही..

बस...

वें मेरे रहें...

हर याद को....

हर याद को....

मैंने...

सितारों की रस्सी पर टांग दिया प्रिय..

कि जब भी...

तुम दमकोगे ना....

दिल के अँधेरे में ...

रात की शाल में...

अपनी ठंडी अँगुलियों को..

ताप लिया करूंगी...

उस स्मृति की अंगीठी में ..

Friday, February 10, 2012

कल रात.....

 
 
 
 
 
कल रात.....

तुमने फिर बेच दिया मुझे.....

और फिर से....

रात ने

चाँद का कुरता उतार फैकाँ...

सौदे में ...बस...

नुंचा लिहाफ हाथ आया ..

चरित्रहीनता का...

Saturday, February 4, 2012

कांच की किरचों तक होकर जब पहुंचे उन तक.....खून न देखा जायेगा कहकर ना मिले वो हमसे..

Friday, February 3, 2012

प्रिय ...तुम्हे जो पा जाती ...

पिघलता रहा अंतस मेरा....

यूँ छू गयी आँखें तुम्हारी...

दो कटोरी सूरज जो मैं...
...
घूँट घूँट पीती जाती ...

धुप का वही टुकड़ा...

शब्दों के पार छिपाती...

उन्ही शब्दों के अम्बार तले....

चुपके से हाथ बढाकर...

प्रिय ...तुम्हे जो पा जाती ...