चूल्हे में...
रात की रोटी की...
महक बाकी है अब तक....
कोयले की ताप से...
गरमाया हैं मेरा चोला....
आँचल की सिलवटों में...
तुम्हारी ही छुअन की ..
नरमाई है अब तक...
उसी सौंधी गंध को पाती.....
अब तक माटी में..
आग सेंक रही है यादें ....
रात की रोटी की...
महक बाकी है अब तक....
कोयले की ताप से...
गरमाया हैं मेरा चोला....
आँचल की सिलवटों में...
तुम्हारी ही छुअन की ..
नरमाई है अब तक...
उसी सौंधी गंध को पाती.....
अब तक माटी में..
आग सेंक रही है यादें ....



1 comments:
एहसास का यह सुन्दर चित्र
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