Saturday, February 11, 2012

चूल्हे में...

चूल्हे में...

रात की रोटी की...

महक बाकी है अब तक....

कोयले की ताप से...

गरमाया हैं मेरा चोला....

आँचल की सिलवटों में...

तुम्हारी ही छुअन की ..

नरमाई है अब तक...

उसी सौंधी गंध को पाती.....

अब तक माटी में..

आग सेंक रही है यादें ....

1 comments:

M VERMA said...

एहसास का यह सुन्दर चित्र