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Friday, February 3, 2012
Blog Archive
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2012
(56)
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►
May
(17)
- रंगरेज़ मेरे ...
- कच्ची शराब
- इतना क्यों याद आ रहे हो ....
- कुछ ऐसे भी दिन टाँक दिये जाते हैं...
- अभिलाषित हुई
- राज़ की एक बात...
- सम-भाव के दो हाइकु को जोड़ने की कोशिश की है...एक नव...
- मेरे सजन ...मेरी सजन ....
- नील पुलिन छिपा है नीलम... नभ से नीला
- तुम्हारी फुर्सत वाली मुस्कान
- कुछ मैं पी लूँगी
- धूप ओढ़ कर खुशबू तेरी...... तुम्हारी बंसी का छल करत...
- काँच के स्वप्न .... कभी चुभे नैनों को .... कभी मन ...
- मेरा हर
- haiku
- ऐसे मिलना तुम...
- मई दिवस
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►
April
(12)
- तुम्हारी पुकार ....
- तुम्हारे साथ सुबह की बाहों में लिपटी रहूँ !!!!
- बारिश में भीग कर
- तुम्हारे साथ सुबह की बाहों में लिपटी रहूँ...!!!!!...
- वो झुक कर बादलों का
- उन आँखों की दमक थी
- माना मैंने...
- सुनो श्याम
- मृग मैं .. मेरी तृष्णा तुम... मीरा मैं... मन-कृष्ण...
- हर छिन सा पत्ता भी जब
- आज लौटी हूँ.... जला कर अस्थियाँ... मृत ख़्वाबों ...
- स्त्रोत प्रीत के सूखे कब के ..
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►
March
(12)
- क्या रोयी थी वो ....
- हाइकु अनुभूति के चरम क्षण की कविता है। सौंदर्यानुभ...
- Swati Bhalotia हाइकु कविता में ५-७-५ का अनुशासन तो...
- चलो बाँट लें
- निज कथा में
- आईने में.....एक चेहरा ...
- अँधेरे से नहाती ये निशा......
- अनुराग की देहरी पर
- उन मीठी सी बातों की...
- बरसती सी बारिश में....
- तुम्हारा स्पर्श था ..
- उतरन सी...
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►
May
(17)




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