वो पल कि जिनमें सान्निध्य तुम्हारा
छू जाता साँसों की धारा
हर क्षण खोना
हर क्षण पाना
यही द्वन्द दिनों का होना
वो दिन कि जिनमें दीप तुम्हारा
मेरी लगन की लौ से हारा
हर क्षण ललकना
हर क्षण जलना
जल कर तुमको स्वयं में पाना .....
बाँध उन लम्हों की
तुम बाँध कर फिर ले आना ....
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