तुम्हारा प्रेम...
मुझे हर क्षण भिगोता ..
अधरों को छूता ..
पलक उठाये
मुझे निहार रहा है
...और इस लम्हे से गुंथी मैं ..
प्रेम की बूँद-बूँद में ...
तुम्हारे स्पर्श के मोती ..
गीले तन पर सजा रही हूँ....
मुझे हर क्षण भिगोता ..
अधरों को छूता ..
पलक उठाये
मुझे निहार रहा है
...और इस लम्हे से गुंथी मैं ..
प्रेम की बूँद-बूँद में ...
तुम्हारे स्पर्श के मोती ..
गीले तन पर सजा रही हूँ....



1 comments:
सुन्दर ! आप इतने लंबे समय के लिए गायब क्यों हो जाती हैं?
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