Thursday, May 5, 2011

तुम हो न अब यहीं..





तुम्हारी याद पर भी ..


बरसों की धूल पसरी थी...

अचानक मिले सिक्के सी..

पड़ी है अब हथेली पर..

पुरानी ,प्रिय और अनमोल..

2 comments:

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

पुरानी ,प्रिय और अनमोल..

क्या हो सकता है ऐसी यादों से सुंदर ..... प्रभावी पंक्तियाँ हैं....

अरूण साथी said...

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।