Tuesday, May 11, 2010

sirf maa ke liye

जीवन पल्लवित और परिष्कृत करने वाली माँ के लिए.....




वात्सल्य का हर क्षण

चम्पई सी मुस्कुराहट

अनुपमित स्नेह

और निवाए से हाथों ने

सीखों का एक गुच्छा बना कर

मन पर सजाया है ,

सजावट का अनुशासन

बांधे है हर उदगार

हर स्वप्न-सींचन...

माँ की आंखों से आया है .....

प्राण-अनुषंग

हर कोमल रंग

रही उनकी ही कृति

कि हरी ने उन्हें

यशोदांश की धारा की ,

दिशाहीन गति औ

झक रजत चन्द्रिका की ,

दिशाहीन फैलाव दिया है

हर मँझदार में किनारा हुई

अंचल से खींचती

वेदना-वेग पारती

माँ......

तुम बहुत थक गई होगी.....

चिर मुस्कान से दीप्त नैन तुम्हारे

अब भी ,

हमें ही खोज रहे हैं.....

तुम्हारे पोरों की स्मृति

भूरी अलकों को

तैल-तोषती

आज भी....

उर-पोषण का

चिर अधिकार लिए है ...

मेरा हर चिकना पत्ता

तुम्हारी नमी लिए है

छाया-छावनी की चाह लिए

मेरी हर कोंपल ,

तकती है तुमको .....

तुम्हारे हर-सम्भव देने के इसी भाव के आगे

मेरा कर्तव्य सदा हारा है........



This is my entry for Blogadda's Contest

12 comments:

दिलीप said...

waah badi hi bhavnatmak rachna...

Gourav Agrawal said...

great expression :)



कुछ लाइन्स मेरी ओर से ....

हर रोज ईश्वर ने जिसे हमारे लिये दुआ करते पाया

हमने उसके लिये सिर्फ़ एक दिन "मदर्स डे" बनाया..


सारी उम्र वो देती ममता का साया

बदले में हमसे सिर्फ़ मदर्स डे पाया ..


हमारी कराहने की आवाज सुन, हर बार उसका दिल घबराया

उसको धीरज देने को हमने "सिर्फ़ एक दिन" मदर्स डे बनाया ...

**********************************

मदर्स डे के शुभ अवसर पर ...... टाइम मशीन से यात्रा करने के लिए.... इस लिंक पर जाएँ :
http://my2010ideas.blogspot.com/2010/05/blog-post.html

Udan Tashtari said...

बहुत भावपूर्ण रचना!

मातृ दिवस की शुभकामनाएँ.

BullsEye said...

Wow !! your Hindi is amazingly good..Nice expression..Loved it..

aarya said...

बहुत सुन्दर| माँ को याद करते हुए मुनौवर राना कि यह पंक्ति याद आती है कि
जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है,
माँ दुआ करती हुयी ख्वाब में आ जाती है .
रत्नेश त्रिपाठी

- The Virgin Author! said...

Brilliantly expressed!

Jayant Chaudhary said...

Very good...
Really enjoyed it.

Maa to maa hi hoti hai..

Sarvottam!!

Jayant

अनिल पाण्डेय said...

आपकी रचना के शब्द हृदय तक पहुंचकर मन मस्तिष्क को तृप्त कर रहे हैं। बहुत ही उम्दा रचना है, वाकई।

मीत said...

wah di itne dino bad aya aj apke blog par padhte hi fir se me apki sandli racnao me doob gya.. Bhaw vibhor ho gya..
Apka meet

अनिल कान्त : said...

बेहद भावनात्मक !!

Ajit Pal Singh Daia said...

वात्सल्य का हर क्षण
चम्पई सी मुस्कुराहट
अनुपमित स्नेह
और निवाए से हाथों ने
सीखों का एक गुच्छा बना कर
मन पर सजाया है ,......
bahut khoob likha hai swati ji, badhai ho..निवाए shabd ka prog mujhe apni matribhasha kee yaad dila gaya..aisa lagta hai aapka nata marwar se raha hai..
-ajit pal singh daia

maverick said...

what great words and depth for the ultimate relation.. that is the genesis of our creation... incredible depth of feeling with the right and apt words...