जीवन पल्लवित और परिष्कृत करने वाली माँ के लिए.....
वात्सल्य का हर क्षण
चम्पई सी मुस्कुराहट
अनुपमित स्नेह
और निवाए से हाथों ने
सीखों का एक गुच्छा बना कर
मन पर सजाया है ,
सजावट का अनुशासन
बांधे है हर उदगार
हर स्वप्न-सींचन...
माँ की आंखों से आया है .....
प्राण-अनुषंग
हर कोमल रंग
रही उनकी ही कृति
कि हरी ने उन्हें
यशोदांश की धारा की ,
दिशाहीन गति औ
झक रजत चन्द्रिका की ,
दिशाहीन फैलाव दिया है
हर मँझदार में किनारा हुई
अंचल से खींचती
वेदना-वेग पारती
माँ......
तुम बहुत थक गई होगी.....
चिर मुस्कान से दीप्त नैन तुम्हारे
अब भी ,
हमें ही खोज रहे हैं.....
तुम्हारे पोरों की स्मृति
भूरी अलकों को
तैल-तोषती
आज भी....
उर-पोषण का
चिर अधिकार लिए है ...
मेरा हर चिकना पत्ता
तुम्हारी नमी लिए है
छाया-छावनी की चाह लिए
मेरी हर कोंपल ,
तकती है तुमको .....
तुम्हारे हर-सम्भव देने के इसी भाव के आगे
मेरा कर्तव्य सदा हारा है........
This is my entry for Blogadda's Contest



12 comments:
waah badi hi bhavnatmak rachna...
great expression :)
कुछ लाइन्स मेरी ओर से ....
हर रोज ईश्वर ने जिसे हमारे लिये दुआ करते पाया
हमने उसके लिये सिर्फ़ एक दिन "मदर्स डे" बनाया..
सारी उम्र वो देती ममता का साया
बदले में हमसे सिर्फ़ मदर्स डे पाया ..
हमारी कराहने की आवाज सुन, हर बार उसका दिल घबराया
उसको धीरज देने को हमने "सिर्फ़ एक दिन" मदर्स डे बनाया ...
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बहुत भावपूर्ण रचना!
मातृ दिवस की शुभकामनाएँ.
Wow !! your Hindi is amazingly good..Nice expression..Loved it..
बहुत सुन्दर| माँ को याद करते हुए मुनौवर राना कि यह पंक्ति याद आती है कि
जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है,
माँ दुआ करती हुयी ख्वाब में आ जाती है .
रत्नेश त्रिपाठी
Brilliantly expressed!
Very good...
Really enjoyed it.
Maa to maa hi hoti hai..
Sarvottam!!
Jayant
आपकी रचना के शब्द हृदय तक पहुंचकर मन मस्तिष्क को तृप्त कर रहे हैं। बहुत ही उम्दा रचना है, वाकई।
wah di itne dino bad aya aj apke blog par padhte hi fir se me apki sandli racnao me doob gya.. Bhaw vibhor ho gya..
Apka meet
बेहद भावनात्मक !!
वात्सल्य का हर क्षण
चम्पई सी मुस्कुराहट
अनुपमित स्नेह
और निवाए से हाथों ने
सीखों का एक गुच्छा बना कर
मन पर सजाया है ,......
bahut khoob likha hai swati ji, badhai ho..निवाए shabd ka prog mujhe apni matribhasha kee yaad dila gaya..aisa lagta hai aapka nata marwar se raha hai..
-ajit pal singh daia
what great words and depth for the ultimate relation.. that is the genesis of our creation... incredible depth of feeling with the right and apt words...
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