Wednesday, March 24, 2010

haiku-rang


हूक हिय की

बरबस छलकी

भीगी दुनिया

8 comments:

sidheshwer said...

सचमुच भीगी

विजयप्रकाश said...

वाह...आंसूओं का सजीव चित्रण.

राकेश कौशिक said...

बहुत खूब - लेकिन लोग आजकल उसे बारिश मानकर नहाते और आनंद लेते हैं और शायद उसमें भी अपना स्वार्थ देखते हैं - गमजदा कम ही होंगे.

M VERMA said...

खूब भीगी
इतना सुन्दर जो रंग बिखेरा

अजय कुमार झा said...

ओह मुद्द्तों बाद आज उनसे जो गुफ़्तगू हुई ...तो भीगना तो लाजिमी था ही ...स्वाति जी ...मुझे भूली तो नहीं हैं न आप ???हां कहेंगी तभी आगे की बातें ..अगली पोस्ट की प्रतीक्षा में
अजय कुमार झा

Udan Tashtari said...

अरे, इसी बहाने दिखी तो. हो कहाँ आजकल. अब नियमित हो जाओ! शुभकामनाएँ.

मीत said...

वाह दी कितना सुंदर लिखा है...
समूचा दर्द इन थोड़े से शब्दों में समेत दिया...
आपको पता है मेरी मंगनी हो गयी है...
आप अपना आशीर्वाद दे देना...
मीत

मीत said...

और हाँ दी आब ब्लॉग एकदम परफेक्ट है... बहुत सुंदर लग रहा है बिलकुल आपके मन जैसा...
मीत