पंक्ति-प्रिया
सचमुच भीगी
वाह...आंसूओं का सजीव चित्रण.
बहुत खूब - लेकिन लोग आजकल उसे बारिश मानकर नहाते और आनंद लेते हैं और शायद उसमें भी अपना स्वार्थ देखते हैं - गमजदा कम ही होंगे.
खूब भीगीइतना सुन्दर जो रंग बिखेरा
ओह मुद्द्तों बाद आज उनसे जो गुफ़्तगू हुई ...तो भीगना तो लाजिमी था ही ...स्वाति जी ...मुझे भूली तो नहीं हैं न आप ???हां कहेंगी तभी आगे की बातें ..अगली पोस्ट की प्रतीक्षा में अजय कुमार झा
अरे, इसी बहाने दिखी तो. हो कहाँ आजकल. अब नियमित हो जाओ! शुभकामनाएँ.
वाह दी कितना सुंदर लिखा है...समूचा दर्द इन थोड़े से शब्दों में समेत दिया...आपको पता है मेरी मंगनी हो गयी है...आप अपना आशीर्वाद दे देना...मीत
और हाँ दी आब ब्लॉग एकदम परफेक्ट है... बहुत सुंदर लग रहा है बिलकुल आपके मन जैसा...मीत
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8 comments:
सचमुच भीगी
वाह...आंसूओं का सजीव चित्रण.
बहुत खूब - लेकिन लोग आजकल उसे बारिश मानकर नहाते और आनंद लेते हैं और शायद उसमें भी अपना स्वार्थ देखते हैं - गमजदा कम ही होंगे.
खूब भीगी
इतना सुन्दर जो रंग बिखेरा
ओह मुद्द्तों बाद आज उनसे जो गुफ़्तगू हुई ...तो भीगना तो लाजिमी था ही ...स्वाति जी ...मुझे भूली तो नहीं हैं न आप ???हां कहेंगी तभी आगे की बातें ..अगली पोस्ट की प्रतीक्षा में
अजय कुमार झा
अरे, इसी बहाने दिखी तो. हो कहाँ आजकल. अब नियमित हो जाओ! शुभकामनाएँ.
वाह दी कितना सुंदर लिखा है...
समूचा दर्द इन थोड़े से शब्दों में समेत दिया...
आपको पता है मेरी मंगनी हो गयी है...
आप अपना आशीर्वाद दे देना...
मीत
और हाँ दी आब ब्लॉग एकदम परफेक्ट है... बहुत सुंदर लग रहा है बिलकुल आपके मन जैसा...
मीत
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