अधरों पर तुम्हारे जो तरसती रही सदा हर वो बात ....... जिसे नैनों ने तुम्हारे संजो रखा था ख़ुद में आज फिर ,चिर प्रत्याशा में हूक रहा है जी ........ उसी इक अनहुए स्पर्श के लिए कि इक बार अधरों से उन लफ्ज़ों को चूने दो........
उसी इक अनहुए स्पर्श के लिए कि इक बार अधरों से उन लफ्ज़ों को चूने दो........ इतनी मीठी-मीठी सी इतनी सुहानी सी लगती है आपकी रचना की बस पढ़ते रहने को जी चाहता है... इश्वर से कामना है की जल्द ही आप अपनी मंजिल पाएं.... मीत
दी क्या मुझे कभी माफ़ी नहीं मिलेगी... आप सबसे गुजारिश है की मेरी दी जो की मुझसे नाराज हैं, उनको समझाएं... की वो मुझे माफ़ कर दें... मुझे तकलीफ हो रही है... मीत
स्वाति जी बहुत दिनों बाद लौटा आपके ब्लॉग पर और इतनी खूबसूरत रचना पढने को मिल गयी...वाह...आप सच में शब्दों की जादूगर हैं लेकिन आपसे एक शिकायत है आप बहुत कम लिखती हैं देखिये पिछले एक महीने से कोई पोस्ट नहीं...उम्मीद है की कुशल पूर्वक होंगी...खुश रहें... नीरज
11 comments:
रचना ने प्रभावित किया । संवेदनापूर्ण ।
YES LAFJO KO CHUNE DO ....
WAH WAH
RAMESH SACHDEVA
बहुत खूब। बधाई।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }
खूबसूरत अहसास को शब्द दिए है
उसी इक अनहुए स्पर्श के लिए
कि इक बार
अधरों से उन लफ्ज़ों को चूने दो........
इतनी मीठी-मीठी सी इतनी सुहानी सी लगती है आपकी रचना की बस पढ़ते रहने को जी चाहता है...
इश्वर से कामना है की जल्द ही आप अपनी मंजिल पाएं....
मीत
ANHUA SPARSH....BAHUT ACHCHA PRAYOG
JAYA
उसी इक अनहुए स्पर्श के लिए
कि इक बार
अधरों से उन लफ्ज़ों को चूने दो........
prbhaavshali rachna
दी क्या मुझे कभी माफ़ी नहीं मिलेगी...
आप सबसे गुजारिश है की मेरी दी जो की मुझसे नाराज हैं, उनको समझाएं... की वो मुझे माफ़ कर दें...
मुझे तकलीफ हो रही है...
मीत
snehil sparsh.
Simple yet impressive...congrats...
स्वाति जी बहुत दिनों बाद लौटा आपके ब्लॉग पर और इतनी खूबसूरत रचना पढने को मिल गयी...वाह...आप सच में शब्दों की जादूगर हैं लेकिन आपसे एक शिकायत है आप बहुत कम लिखती हैं देखिये पिछले एक महीने से कोई पोस्ट नहीं...उम्मीद है की कुशल पूर्वक होंगी...खुश रहें...
नीरज
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