Friday, July 3, 2009

उन लफ्ज़ों को चूने दो.....

अधरों पर तुम्हारे
जो तरसती रही सदा
हर वो बात .......
जिसे नैनों ने तुम्हारे
संजो रखा था ख़ुद में
आज फिर ,चिर प्रत्याशा में
हूक रहा है जी ........
उसी इक अनहुए स्पर्श के लिए
कि इक बार
अधरों से उन लफ्ज़ों को चूने दो........

11 comments:

हिमांशु । Himanshu said...

रचना ने प्रभावित किया । संवेदनापूर्ण ।

ACHARYA RAMESH SACHDEVA said...

YES LAFJO KO CHUNE DO ....
WAH WAH

RAMESH SACHDEVA

Science Bloggers Association said...

बहुत खूब। बधाई।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

डॉ .अनुराग said...

खूबसूरत अहसास को शब्द दिए है

मीत said...

उसी इक अनहुए स्पर्श के लिए
कि इक बार
अधरों से उन लफ्ज़ों को चूने दो........
इतनी मीठी-मीठी सी इतनी सुहानी सी लगती है आपकी रचना की बस पढ़ते रहने को जी चाहता है...
इश्वर से कामना है की जल्द ही आप अपनी मंजिल पाएं....
मीत

abhivyakti said...

ANHUA SPARSH....BAHUT ACHCHA PRAYOG
JAYA

श्रद्धा जैन said...

उसी इक अनहुए स्पर्श के लिए
कि इक बार
अधरों से उन लफ्ज़ों को चूने दो........

prbhaavshali rachna

मीत said...

दी क्या मुझे कभी माफ़ी नहीं मिलेगी...
आप सबसे गुजारिश है की मेरी दी जो की मुझसे नाराज हैं, उनको समझाएं... की वो मुझे माफ़ कर दें...
मुझे तकलीफ हो रही है...
मीत

रवीन्द्र दास said...

snehil sparsh.

Pramod Kumar Kush 'tanha' said...

Simple yet impressive...congrats...

नीरज गोस्वामी said...

स्वाति जी बहुत दिनों बाद लौटा आपके ब्लॉग पर और इतनी खूबसूरत रचना पढने को मिल गयी...वाह...आप सच में शब्दों की जादूगर हैं लेकिन आपसे एक शिकायत है आप बहुत कम लिखती हैं देखिये पिछले एक महीने से कोई पोस्ट नहीं...उम्मीद है की कुशल पूर्वक होंगी...खुश रहें...
नीरज