Thursday, July 2, 2009

बूंदों की रुन-झुन


बूंदों की रुन-झुन
औ गीले स्पर्श की गीली सी धुन ....
सुमन का यौवन
कि पंखुडी का कटाव
इस द्वैत का समस्त भाव
संपूर्ण रूप का ये इक छल
हर उर बांधे....हर पल-पल.......

10 comments:

M VERMA said...

इस द्वैत का समस्त भाव
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कविता का सुन्दर प्रभाव
बहुत सुन्दर

रंजना [रंजू भाटिया] said...

सुन्दर कविता है

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत बढ़िया चित्र और रचना ..

रंजना said...

Waah !! Atisundar bhavabhivyakti...

संगीता पुरी said...

वाह !!

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

आनन्द आ गया जी...।

अक्षय-मन said...

nirmal,komal bhav......

bahut acchi rachna...

अभिषेक ओझा said...

एक और कमाल !

Udan Tashtari said...

बहुत कोमल अभिव्यक्ति!

‘नज़र’ said...

वाह, बहुत ख़ूब

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विज्ञान । HASH OUT SCIENCE