Monday, February 2, 2009

बसंती हाइकु

सादा माखन
संग मक्की की रोटी
बसंती स्वाद


पीत पराग
हर पंखुडी पीली
बसंत आयो


सुन पुकार
संग हवा की धार
डोले सरसों
नर्म किरण
नर्म फूलों के गाल
बसंती प्रातः
इतने दिनों के अन्तराल के लिए क्षमा चाहती हूँ.........निरंतर लिखने का प्रयास जारी रखूंगी....










21 comments:

हिमांशु said...

मनमोहक चित्रों के साथ ये हाइकु अच्छे लगे.

नीरज गोस्वामी said...

अद्भुत स्वाति जी अद्भुत....जितने सुंदर चित्र उतने ही सुंदर भाव....आप तो हाईकू लेखन में एक दम सिद्ध हैं...बधाई...
नीरज

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया पोस्ट है बधाई।

दिगम्बर नासवा said...

बसंती चित्रों के साथ...........बसंती हाइकु
खूबसूरत...........

अभिषेक ओझा said...

वसंत का खूब स्वागत किया आपने !
सच कहूं तो मन हर्षित हो गया.

"अर्श" said...

SWATI JI BAHOT HI BADHIYA HAIKU LIKHE HAI AAPNE ,SATH ME NIRANTARTA KA WADA KIYA YE AUR BHI ACHHI BAAT KAR DALI AAPNE ... DHERO BADHAI AAPKO..


ARSH

रंजना [रंजू भाटिया] said...

खूबसूरत बसंत खूबसुरत हाइकु के साथ ...बहुत बढ़िया लगे सब

chopal said...

साधारण शब्दों के माध्यम से असाधारण अभिव्यक्ति....................

mehek said...

bahut sundar

रंजना said...

वाह ! जितने सुंदर चित्र उतने ही सुंदर ये संक्षिप्त कवितायें(हाइकू).

विनय said...

हर haiku का अपना स्वाद!

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ज़रूर पढ़ें:
हिन्द-युग्म: आनन्द बक्षी पर विशेष लेख

मीत said...

आपका लेखन बहुत अच्छा लगता है...
बहुत सुंदर लिखा है...
मीत

डॉ .अनुराग said...

पहला हाइकू ..खास खुशबु दे गया

makrand said...

bahut khub

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

बहुत खूब स्वाति जी,
सुँदर स्वागत किया आपने !
- लावण्या

गौतम राजरिशी said...

डाक्टर साब के सुर-में-सुर मिलाते हुये और सुर को तनिक आगे बढ़ाते हुये,पहला हाइकु न बस खास खुश्बू दे गया,मगर स्वाद भी

Pratap said...

देखन को छोटन लगे, घाव करत गंभीर.

महावीर said...

बहुत सुंदर हाइकू हैं और मक्की की रोटी, साथ में बसंती रंग के फूलों के चित्र - आनंद आ गया।

dr. ashok priyaranjan said...

स्वाति जी,
बहुत सुंदर हाइकू हैं..बसंती चित्रों के साथ

Science Bloggers Association of India said...

बसंती हाइकु पढकर मन मुग्ध हो गया। कृपया इसे जारी रखें।

Jayant Chaudhary said...

Likhate rahen...

~Jayant