Friday, November 28, 2008

प्रकृति-वधु

दुग्ध की धारा
काई का उबटन
प्रकृति-वधु

लाल सिंदूर
शुभ चंदन-टीका
आई प्रातः

12 comments:

परमजीत बाली said...

बहुत सुन्दर चित्र प्रेषित किए है।

अभिषेक ओझा said...

सुंदर हाइकु शब्द-चित्र !

klaudiax said...

hi!..i think you have beautiful pictures, congrats!

ciao

Akshaya-mann said...

fir se wahi shabd honge mere.....
ab ki baar ehsaas kar lijiye bas.........


एक दर्पण,दो पहलू और ना जाने कितने नजरिये /एक सिपाही और एक अमर शहीद का दर्पण और एक आवाज
अक्षय,अमर,अमिट है मेरा अस्तित्व वो शहीद मैं हूं
मेरा जीवित कोई अस्तित्व नही पर तेरा जीवन मैं हूं
पर तेरा जीवन मैं हूं

अक्षय-मन

डॉ .अनुराग said...

गोरा चेहरा
लाल टीका
शहीद को नमन

मीत said...

चाँद शब्द
ह्रदय के चोर
सुन्दरता सराबोर



--- मीत

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा said...

बहुत सुन्दर चित्र..

विकास कुमार said...

ठीक ही है. लिखिये लिखिये. :)

dr. ashok priyaranjan said...

जीवन िस्थितयों को आपने बडे यथाथॆपरक ढंग से शब्दबद्ध िकया है । अच्छा िलखा है आपने । शब्दों में यथाथॆ की अिभव्यिक्त है । मैने अपने ब्लाग पर एक लेख िलखा है । समय हो तो पढें और प्रितिक्रया भी दें -
http://www.ashokvichar.blogspot.com

RAJ SINH said...

aapke chitra aur haikoo.kitnon ko banaya kavi !

BrijmohanShrivastava said...

मुझे बहुत प्रेरणा व मार्गदर्शन मिलता है आपसे

bahadur patel said...

bahut sundar chitra hyku ke sath. wah!